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Monday, 26 September 2011

RAJBHAR

राजभर की यही पुकार है, एकमत हमारी गुहार है
मिलकर हम सब राजभर,हम राजभर राजभर है
जाती छुपाये बैठे है राजभर भाई,बहार निकलोराजभर भाई
आप हो राज दुलारे ,शिवजी राजभर यही पुकारे
जागो राजभर मेरे भाई ,अपने जाती का नाम दर्साओ
भारत देश में झंडा फहरवो,राजभर होने का गर्व दिखलाओ
शिवजी का है यही पुकार,एकमत हमारी आप से है गुहार
श्रावस्ती सम्राट वीर,सुहेल जी को देखो
१०२६ ई में राजतिलक हुवा ,९०० वर्षो तक इतिहास के पन्नो में
राष्ट्रके रक्षा के लिए ,२१ राजाओ को एकत्र किये
नेपाल से लेकर दक्षिण में,कौसम्बी से लेकर
पूर्व से लेकर पश्चिम ,गढ़वाल तक उन्होंने राज किये
फिर क्यों जाट छुपाये ,बैठे हो मेरे भाई
खुल कर आओ अपने नाम के,आगे राजभर लगाई
यही मेरे पुकार है,एकमत ही हमारी गुहार है
राजभर मेरे गर्व ही नहीं ,आत्म विस्वास है
खुल कर आओ राजभर भाई,यही हमारी शान है
मात्र भूमि में अपने नाम का,यही हमारी पहचान है
भर ही भारत राज ही राजा,यही हमारी पुकार है
एकमत ही मेरे संसार है,आप से ही तो मेरी गुहार है
अमर राजभर जी सुरहन आजमगढ़ 
उत्तर प्रदेश २२३२२४

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